सदविचार
Friday, October 03, 2008
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...............उसमें मदिरा नहीं शीतल जल की धारा बहती है।
पाषाण के भीतर भी मधुर स्रोत होते हैं, उसमें मदिरा नहीं शीतल जल की धारा बहती है। जयशंकर प्रसाद
Friday, October 03, 2008
पाषाण के भीतर भी मधुर स्रोत होते हैं, उसमें मदिरा नहीं शीतल जल की धारा बहती है। जयशंकर प्रसाद
प्रवीण त्रिवेदी
Friday, October 03, 2008