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  1. जेतनी संख्या मा खउहा हैं उतनी ही संख्या मा देखउहा ! ई खड़े-खड़े खाली फोटू खिंचा रहे हैं ?

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  2. ई लोग बनाय रहे हैं,हमको लगा घेर के खाय रहे हैं !

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  3. @संतोष त्रिवेदी
    ई तो हैये है .....मुफ्त माल में कई लोगों की निगाह रहती है|
    इसलिए खउहा और देखउहा मा ज्यादा अंतर नहीं है| यह फोटू बच्चों को मिड डे मील के वितरण के बाद की है ......जिसमे बनाने वाली रसोइये अपने लिए कुछ और रोटियां सेंक रही हैं| जाड़े के दिन हैं ....जाहिर है चूल्हे का सानिध्य सबको भाता है|

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  4. अच्छी नज़र है,पूरे तंत्र पर तमाचा |

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